An Autumn Afternoon
“Waste not your thoughts on eternity....Drain your Glass ere life is gone”
हिरायामा अपने स्कूल के
सहपाठियों के साथ प्रायः एक बार में मिलता है । एक शाम वे अपनी स्कूल के अध्यापक (
ह्योतान) को भी आमंत्रित करते हैं। बहुत दिनों बाद सब मिलते हैं उनसे।
नशे कि हालत में हयूतान उन्हे बताता है कि उसकी एक अधेड़ उम्र कि लड़की भी है
जिसकी वो शादी नहीं कर पाया । वो उसकी
देखभाल करती है। वो कहता है उसने बहुत बड़ी गलती कर दी , मेरे
स्वार्थ ने मेरी बेटी का जीवन नष्ट कर दिया, मैंने उसे अपने पास रखा क्यूंकी में अकेला था । उसके
विवाह के मौके आए थे, लेकिन मैंने उन मौकों को खो दिया ।
हयूतान उनसे कहता है वो बहुत
अकेला है , अकेला और दुखी। अंत में हम अपना जीवन अकेले ही व्यतीत करना पड़ता है।
नितांत अकेले।
अध्यापक हयूतान कि ये बातें
हिरायामा के मन में घर कर जाती है, वो बैचेन हो उठता है, वो नहीं चाहता कि उसकी बेटी
भी अविवाहित और अकेली रह जाए और हयूतान कि बेटी कि तरह अपनी दुर्दशा पर आँसू
बहाये। भले ही वो अकेला रह जाये लेकिन लेकिन अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए अपनी बेटी
के साथ ऐसा अन्य नहीं कर सकता।
हिरायामा उसके विवाह के
प्रयास में लग जाता है। पहले बेटी आनाकानी करती है लेकिन वो भी मान जाती है।
हिरायामा , उसका परिवार और उसके मित्र सबके प्रयासों से अंततः मिचिकों का
विवाह हो जाता है।
फिल्म के अंतिम दृश्य में जब हिरायामा बेटी को विदा कर नशे में धुत्त घर लौटता है, घर खाली होता है , सिर्फ छोटा लड़का वहाँ होता है, हिरायामा भी स्वयं को अकेला पाता है ।
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