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Yasujirō Ozu 小津 安二郎

Yasujiro Ozu (1903 -1963) अगर आपको 60s की ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्में पसंद हैं जैसे की आनंद, मुसाफिर, अनुपमा, सत्यकाम , बावर्ची या अभिमान तो आपको जापान के सुप्रषिद्ध निर्देशक यासुजीरों ओज़ू अवश्य ही पसंद आएंगे । यासुजीरों जापान के उत्कृष्ट डाईरेक्टर्स मे से एक है । जिन्हे हम आर्ट हाउस सिनेमा वाले कहते हैं जैसे की फ्रेडेरिकों फेलिनी , अकीरा कुरोसावा , Jean Renoir या हमारे खुद के सत्यजित रे जैसे । यासुजीरों को जापान के श्रेष्ठतम डाईरेक्टर्स में भी “The Most Japanese of all the Japanese directors ” कहा जाता है इनकी फिल्मों में जापान के मॉडर्न और परंपरागत मूल्यों के बीच के द्वंद में सामंजस्य को दर्शाती हैं जैसा की हमे दो पीढ़ियों में देखते हैं । उनकी निर्देशित Tokyo Story फिल्म को विश्व की सर्वोत्तम फिल्मों मे से एक माना जाता है । स्कूल के दिनों मे ओज़ू कक्षा बँक करके फिल्में देखने भाग जाते थे । ओज़ू ने जब Civilization (1916) देखि तो उनपर फिल्म बनाने का भूत सवार हो गया । ओज़ू ने अपना कैरियर एक असिस्टेंट डाइरेक्टर के रूप में आरंभ किया , फिर कुछ शॉर्ट कॉमेडी फिल्में बनाई , फिर 1929 में अपनी पहली ...
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Brothers and Sisters of the Toda Family (戸田家の兄妹, Toda-ke no kyōdai) 1941

  कुछ लोगों की उपस्थिती मात्र ही आप को ऊर्जा एवं सुख से भर देती है, पिता के देहांत के एक वर्ष पश्चात टोडा परिवार के दूसरे बेटे शोजीरों का आगमन भी माँ और बहन के लिए कुछ ऐसा ही था। सम्पन्न टोडा परिवार के मुखिया शीनतारों टोडा का उनके 69 वें जन्मदिवस की संध्या को ही निधन हो जाता है। मृत्यु के बाद जब पता चलता है कि पिता उधारी छोड़ कर गए हैं तब सारे भाई-बहन उनकी संपाति बेचने का निर्णय लेते हैं। केवल एक जर्जर घर रह जाता है। दूसरे नंबर का भाई शोजीरों काम के सिलसिले में चाइना चला जाता है । माता और छोटी बहन का दायित्व अन्य भाई-बहनों पर आता है, जो बारी-बारी उनका भार वहन करते हैं। लेकिन सब अनमने से ही होते हैं कोई भी वृद्ध माँ और छोटी बहन कि देख-रेख ढंग से नहीं करता , सबके लिए वो दोनों एक आफत और बोझ ही होते है। अंततः दोनों माँ-बेटी उस बचे हुए पुराने घर में रहने चली जाती हैं। पिता कि बरसी पर जब शोजीरों चीन से लौटता है तब माँ और बहन कि अवस्था देख आग बबूला हो उठता है और सब भाई बहनों कि ठीक से खिंचाई करता है और उन्हें घर से निकल जाने को कहता है। शोजीरों माँ और बहन को अपने साथ चीन ले जाने का निर्...

What Did the Lady Forget? (淑女は何を忘れたか)1937

मेडिकल प्रोफेसर कोमियों के शांत-सुचारु जीवन में खलबली तब मचाती है जब सका से उनकी भतीजी सेत्सुकों का आगमन होता है। सेत्सुकों वैसे है तो नाबालिक किन्तु बड़ी ही मनमौजी और बेलौस किस्म की लड़की है । उसे सिगरैट, शराब और घूमना पसंद है। कोमियों शांत स्वभाव के हैं लेकिन पत्नी टोकिकों बेहद धौंस जमाने वाली मालिकाना किस्म की महिला है। सेत्सुकों को ये बिलकुल पसंद नहीं है। एक दिन कोमियों अपनी पत्नी को गोल्फ खेलने जा रहे हैं बोल कर अपने स्टूडेंट ओकाडा के पास रहने चले जाते हैं पीछे पीछे सेत्सुकों भी आ धमकती है । नशे में चूर सेत्सुकों को ओकाडा घर छोड़ने आता है। टोकिकों गुस्सा होती हैं लेकिन सेत्सुकों पर कोई फरक नहीं पड़ता। पति के लौटने पर टोकिकों शिकायत करती है । पत्नी को ये भी पता चल जाता है की वो गोल्फ खेलने नहीं गए थे। वो उन्हे धमकाती है । सेत्सुकों को कोमियों का शांत और दब्बू स्वभाव पसंद नहीं आता वो उन्हेकड़ा रुख अपनाने को कहती हैं । दूसरी शाम चाचा भतीजी फिर शराब पी कर आते हैं तो टोकिकों बिफर पड़ती है । तो इस पर कोमियों उसे एक थप्पड़ जड़ देता है। सेत्सुकों का तीर निशाने पर लगता है , वो दिखावे के लिए टोकि...

There Was a Father (父ありき Chichi Ariki) 1942

  र्योहे की बचपन से यह चाह थी की वो अपने पिता के साथ रहे। लेकिन ये चाह पूरी होने पहले ही पिता चल बसे। लेकिन र्योहे को कम से कम ये संतुष्टि थी की मृत्यु के पूर्व एक सप्ताह वो और पिता साथ-साथ रहे थे। वो उसके जीवन का सर्वश्रेष्ठ सप्ताह था। विदुर शुहे होरिकावा एक अध्यापक हैं, उनका एक 10 वर्षीय पुत्र भी है जो उनके साथ ही रहता है। स्कूल में एक पिकनिक के दौरान एक छात्र की मृत्यु हो जाती है , चूंकि उस पिकनिक का दायित्व शुहे पर था वो त्यागपत्र दे देता है । पिता अपने बेटे को एक बोर्डिंग स्कूल में भर्ती करवा कर स्वयं टोक्यो चले जाते हैं। समय बीतता है र्योहे 25 वर्ष का हो चुका है और अब वो भी एक अध्यापक है। एक बार जब वो पिता से मिलने आता है तो उनके साथ ही रहने की इच्छा व्यक्त करता है । पिता नकार देते हैं और उसे अपने भविष्य और काम पर ध्यान देने को कहते हैं। र्योहे 10 दिन की छुट्टी पर टोक्यो आया हुआ है, पिता चाहते हैं की र्योहे उनके मित्र हिराटा की पुत्री फुमिकों से विवाह कर ले। एक रात जब पिता जब अपने पुराने छात्रों की reunion से लौटते है तो उनको हृदयाघात होता है। हॉस्पिटल में पिता देहांत पूर्व ...

Days of Youth (学生ロマンス 若き日, Gakusei romance: Wakaki hi, 1929)

  यह यासुजिरो ओज़ु की सबसे पुरानी surviving फिल्म है । इसके पहले की फिल्मों के प्रिंट नष्ट हो चुके हैं या खो चुके हैं। फिल्म में Pre-War जापान की कॉलेज लाइफ दर्शाई गयी है। जैसा की सबकी युवावस्था में होता है - एक कमरे वाला जीवन, बोरियत से भरी पढ़ाई , पैसों कि कमी , प्रेम-लड़कियां, यार-दोस्त, मस्ती-मज़ाक, ये कहानी भी वैसी ही है। फिल्म को हम एक buddy-comedy, slapstick comedy या love triangle कह सकते हैं। कहानी दो युवाओं की है (वाटानाबे और यामामोटो) जो skiing trip पर जाते हैं और एक ही लड़की (चिएको ) को पटाने का जतन करते हैं। एक अपने कमरे के बाहर To-let का स्टिकर चिपकता है ताकि वो लड़की रूम पार्टनर के रूप में मिल जाये, दूसरा उसको चाय पर ले जाता है। कॉलेज की परीक्षा समाप्त होती है तो दोनों skiing trip पर जाते है , वहाँ वो लड़की चिएको भी होती है। दोनों में उसको पटाने की होड़ मच जाती है। स्पर्धा लगी रहती है। बाद में दोनों को पता चलता है कि चिएको तो वास्तव में हाटामोटों नाम के एक दूसरे लड़के के साथ अपनी मंगनी (matchmaking meeting ) तय करने के लिए आई है। दोनों हाथ मलते रह जाते हैं। दोनों trip समा...

Early Spring - 早春 - Sōshun (1956)

 “ कुछ लोगों का जीवन छोटा होता है लेकिन सुखमय होता है,  हम जिये जा रहे हैं लेकिन सुखी नहीं है । “ कहानी के नायक सुगियामा की अपनी सहकर्मी शोजी(गोल्डफिश) के साथ विवाहेतर संबंध (extra-marital affair) की कहानी है। साथ ही साथ यह एक नौकरीपेशा आदमी की जीवन से मोहभंग करुण और लाचार मनोदशा को भी दर्शाती है। ओज़ू के शब्दों में - "I wanted to have a go at representing their lifestyle. The thrill and aspirations one feels as a fresh graduate entering society gradually wane as the days go by. Even working diligently for thirty years doesn't amount to much." सुगियामा को अपनी सहकर्मी से प्यार हो गया है। उसकी बीवी मसाको को संदेह होने लगता है जब वो उसे खोया-खोया हुआ देखती है ,संदेह और भी गहरा हो जाता है जब सुगियामा अपने बच्चे की बरसी भी मानना भूल जाता है ।  ऑफिस के सहकर्मियों को भी उनके चक्कर का पता चलता है । मसाको घर छोड़ के माँ के पास चली जाती है । उधर सुगियामा का ऑफिस से स्थानांतरण हो जाता है । वो मसाको से मिलने का प्रयत्न करता है किन्तु असफल रहता है। वो टोक्यो छोड़ कर मिटसूईसी नामक छ...

An Inn in Tokyo (東京の宿, Tōkyō no yado) 1935

  An Inn in Tokyo (東京の宿, Tōkyō no  yado) 1935  Its Awful to be Poor किहाची अपने दो छोटे लड़कों ज़ेन्को और मसाको के साथ काम के तलाश में मारा-मारा भटक रहा है । नौकरी है कि मिल ही नहीं रही । उस समय शायद रेबीज़ का प्रकोप चल रहा था, तो अगर किसी आवारा कुत्ते को पकड़ के नगर पालिका को सौंप दिया जाए तो उसके बदले कुछ पैसे दिये जाते थे। तो दिन भर नौकरी ढूंढो न मिले तो कुत्ता ढूंढो । किहाची और उसके लड़कों के पास ये एक उपाय था भोजन का प्रबंध करने का। रात को वो किसी सराय में सो जाते।  एक दिन जब वो किसी होटल पर खाना खा चुके होते हैं तो उसकी मालकिन ओटसुने किहाची कि परिचित निकलती है। वो उसके लिए नौकरी ढूंढ देती है और रहने का प्रबंध कर देती है। उसके बच्चे भी स्कूल जाने लगते हैं।  बेरोजगारी के दिनों में किहाची कि जान पहचान ओटाका और उसकी छोटी बच्ची कीमिकों से होती है, वो भी काम कि तलाश में है ।  किहाची उन्हे भी खाना खिलाने ओटसुने के पास लाता है। कीमिकों और किहाची के लड़कों कि अच्छी मित्रता हो जाती है । वे रोज़ स्कूल के पश्चात खेलने के लिए मिलते है। जब कई दिनों तक कीमिकों खेलने नह...

The Only Son 一人息子, Hitori Musuko Yasujiro Ozu’s first Talkie (1936)

The Only Son 一人息子, Hitori Musuko (1936)  Tragedy in Life starts with the bondage of Parent and Child. निराशा – जब एक आदमी बहुत कुछ करना चाहता है , पाना चाहता है , इसके लिए घर से दूर भी जाता है, परिश्रम भी करता है, सब कुछ त्याग भी करता है … लेकिन इन सब के उपरांत जब वो कुछ भी प्राप्त नहीं कर पाता है और स्वयं को उस स्थान पर पाता हैं जहां उसे लगता है कि उसके जीवन का एक पड़ाव समाप्त हो चुका होता है । ऐसी परिस्थिति में मनुष्य चाहे कितना भी महत्वाकांक्षी, आत्मविश्वासी अथवा साहसी क्यूँ न रहा हो वो अपने आप को निराश ही पाता है । बात 1923 कि है, 13 वर्षीय र्योसूके अपनी निर्धन मजदूर माँ नोनोमिया के साथ जापान के सिनशु गाँव में रहता है। प्राथमिक शिक्षा समाप्त हो चुकी है और उसके साथी आगे पढ़ने के लिए टोक्यो जा रहे हैं, र्योशूके भी जाना चाहता है । उसकी माँ असमर्थ है लेकिन अपने बेटे को दुःखी और उदास पा उसे टोक्यो भेजने का निर्णय लेती है। र्योसूके माँ से कहता है कि वो उसे अवश्य एक दिन एक बड़ा आदमी बन कर दिखाएगा । 13 वर्ष बीठ चुके है, र्योसूके भी अब 26 वर्ष का हो चुका है, उसकी माँ उससे मिलने टोक्य...