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Showing posts from October, 2020

Early Spring - 早春 - Sōshun (1956)

 “ कुछ लोगों का जीवन छोटा होता है लेकिन सुखमय होता है,  हम जिये जा रहे हैं लेकिन सुखी नहीं है । “ कहानी के नायक सुगियामा की अपनी सहकर्मी शोजी(गोल्डफिश) के साथ विवाहेतर संबंध (extra-marital affair) की कहानी है। साथ ही साथ यह एक नौकरीपेशा आदमी की जीवन से मोहभंग करुण और लाचार मनोदशा को भी दर्शाती है। ओज़ू के शब्दों में - "I wanted to have a go at representing their lifestyle. The thrill and aspirations one feels as a fresh graduate entering society gradually wane as the days go by. Even working diligently for thirty years doesn't amount to much." सुगियामा को अपनी सहकर्मी से प्यार हो गया है। उसकी बीवी मसाको को संदेह होने लगता है जब वो उसे खोया-खोया हुआ देखती है ,संदेह और भी गहरा हो जाता है जब सुगियामा अपने बच्चे की बरसी भी मानना भूल जाता है ।  ऑफिस के सहकर्मियों को भी उनके चक्कर का पता चलता है । मसाको घर छोड़ के माँ के पास चली जाती है । उधर सुगियामा का ऑफिस से स्थानांतरण हो जाता है । वो मसाको से मिलने का प्रयत्न करता है किन्तु असफल रहता है। वो टोक्यो छोड़ कर मिटसूईसी नामक छ...

An Inn in Tokyo (東京の宿, Tōkyō no yado) 1935

  An Inn in Tokyo (東京の宿, Tōkyō no  yado) 1935  Its Awful to be Poor किहाची अपने दो छोटे लड़कों ज़ेन्को और मसाको के साथ काम के तलाश में मारा-मारा भटक रहा है । नौकरी है कि मिल ही नहीं रही । उस समय शायद रेबीज़ का प्रकोप चल रहा था, तो अगर किसी आवारा कुत्ते को पकड़ के नगर पालिका को सौंप दिया जाए तो उसके बदले कुछ पैसे दिये जाते थे। तो दिन भर नौकरी ढूंढो न मिले तो कुत्ता ढूंढो । किहाची और उसके लड़कों के पास ये एक उपाय था भोजन का प्रबंध करने का। रात को वो किसी सराय में सो जाते।  एक दिन जब वो किसी होटल पर खाना खा चुके होते हैं तो उसकी मालकिन ओटसुने किहाची कि परिचित निकलती है। वो उसके लिए नौकरी ढूंढ देती है और रहने का प्रबंध कर देती है। उसके बच्चे भी स्कूल जाने लगते हैं।  बेरोजगारी के दिनों में किहाची कि जान पहचान ओटाका और उसकी छोटी बच्ची कीमिकों से होती है, वो भी काम कि तलाश में है ।  किहाची उन्हे भी खाना खिलाने ओटसुने के पास लाता है। कीमिकों और किहाची के लड़कों कि अच्छी मित्रता हो जाती है । वे रोज़ स्कूल के पश्चात खेलने के लिए मिलते है। जब कई दिनों तक कीमिकों खेलने नह...

The Only Son 一人息子, Hitori Musuko Yasujiro Ozu’s first Talkie (1936)

The Only Son 一人息子, Hitori Musuko (1936)  Tragedy in Life starts with the bondage of Parent and Child. निराशा – जब एक आदमी बहुत कुछ करना चाहता है , पाना चाहता है , इसके लिए घर से दूर भी जाता है, परिश्रम भी करता है, सब कुछ त्याग भी करता है … लेकिन इन सब के उपरांत जब वो कुछ भी प्राप्त नहीं कर पाता है और स्वयं को उस स्थान पर पाता हैं जहां उसे लगता है कि उसके जीवन का एक पड़ाव समाप्त हो चुका होता है । ऐसी परिस्थिति में मनुष्य चाहे कितना भी महत्वाकांक्षी, आत्मविश्वासी अथवा साहसी क्यूँ न रहा हो वो अपने आप को निराश ही पाता है । बात 1923 कि है, 13 वर्षीय र्योसूके अपनी निर्धन मजदूर माँ नोनोमिया के साथ जापान के सिनशु गाँव में रहता है। प्राथमिक शिक्षा समाप्त हो चुकी है और उसके साथी आगे पढ़ने के लिए टोक्यो जा रहे हैं, र्योशूके भी जाना चाहता है । उसकी माँ असमर्थ है लेकिन अपने बेटे को दुःखी और उदास पा उसे टोक्यो भेजने का निर्णय लेती है। र्योसूके माँ से कहता है कि वो उसे अवश्य एक दिन एक बड़ा आदमी बन कर दिखाएगा । 13 वर्ष बीठ चुके है, र्योसूके भी अब 26 वर्ष का हो चुका है, उसकी माँ उससे मिलने टोक्य...