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Showing posts from September, 2020

Ozu and His Vase

Ozu and His Vase Late Spring फिल्म में दर्शाये गए Vase पर बहुत से फिल्म लेखको और क्रिटिक्स ने बहुत कुछ लिखा है। प्रतिकात्मक दृश्य या वस्तु फिल्मों में एक आम बात है । किसी विषय को एक अलग अभिव्यक्ति देना ही उसका उदेश्य होता है। लेकिन देखने वाला इसे कैसे देखता है या इसमे क्या देखता है ये पूर्णतया उस व्यक्ति के तात्कालिक मनोभावों पर निर्भर करता है। नोरिकों ने अंततः विवाह करने का निश्चय कर लिया है और अपने पिता के पुनर्विवाह को लेकर भी कोई मैल उसके मन में नहीं है। एक आत्म-संतुष्टि का भाव है उसके चेहरे पर। पिता भी चैन की नींद ले रहे हैं। यहाँ पर Vase की बात करें तो निर्देशक हम दर्शकों को आत्म- चिंतन करने का एक अवसर दे रहा है। ताकि हम उन दोनों से हट कर कुछ क्षण चिंतन कर सके क्यूंकी अगर नायिका-नायक का चेहरा सामने रहे तो हम उनके साथ ही बहते चले जाएंगे। दूसरी बात करें तो, ओजू जैसे मंझे हुए निर्देशक का कोई भी फ्रेम व्यर्थ का नहीं हो सकता है ये तो निश्चित है। किसी भी फिल्म में हर दृश्य कहानी का अंग होता है हमे लगे या न लगे। इस संदर्भ में अगर Vase को ले तो ये एक तरह का अकेलापन दर्शाता है । शायद बेटी...

Late Autumn (秋日和, Akibiyori , "A Calm Autumn Day") 1960

  तीन मित्र अपने एक दिवंगत मित्र की बेटी का विवाह करने का दायित्व लेते हैं। एक शाम तीन मित्र अपने एक मित्र की बरसी पर उसकी विधवा पत्नी अकीको और बेटी अयाको से मिलते हैं। बेटी 24 वर्ष की हो चुकी है और तीनों को लगता है की उसकी आयु विवाह योग्य हो चुकी है। वे उसके लिए उपयुक्त वर की तलाश में लग जाते हैं। लड़का मिलता भी है लेकिन लड़की सहमत नहीं होती है क्यूंकी उसे चिंता है की विवाह के पश्चात उसकी माँ अकेली रह जाएगी और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं रहेगा। Late Spring फिल्म में भी कुछ ऐसा ही ताना-बाना होता है । उसमे एक विदुर पिता को अपनी 28 वर्षीय बेटी के विवाह की चिंता है और बेटी पिता को अकेला नहीं छोड़ना चाहती है । जिस तरह से Late Spring में पिता के पुनर्विवाह की बात निकाल कर आती है उसी तरह Late Autumn में तीनों मित्र सोचते हैं कि अगर इसकी माँ का पुनर्विवाह कर दिया जाये तो शायद लड़की मान जाये। तीनों मित्र लड़की की माँ पर अपने कॉलेज के दिनों मे फ़िदा थे । उन तीनों मे से एक मित्र हिरायामा विदुर भी है सो उसे ही चुना जाता है कि वो लड़की कि माँ से विवाह कर ले । हिरायामा तैयार भी हो जाता है...

Early Summer (麦秋, Bakushū) 1951

नोरिकों की आयु 28 वर्ष हो चुकी है , परिवार के सब लोग चाहते हैं कि वो शीघ्र विवाह कर ले।  फिल्म की कहानी Post War जापान की जब सामाजिक परिदृश्य बादल रहे होते हैं। महिलाओं की समाज में भागीदारी बढ़ रही थी। फिल्म की नायिका नोरिकों एक आकर्षक युवती है , ऑफिस में काम भी करती है तो घरेलू भी है । उसकी सहेलियों भी अधिकतर विवाहित हैं। घर के लोग भी इतनी बड़ी लड़की को घर पर नहीं रखना चाहते। जब नोरिकों का बॉस साताके उसके लिए एक वर प्रस्तावित करता है तो उसके परिवार वाले उत्साहित हो जाते हैं। लेकिन वो लड़का 42 वर्ष का है , आयु अंतर अधिक होता है तो घर में ही वो प्रस्ताव रफा दफा हो जाता है। चिंता ज्यों की त्यों बनी रहती है। नोरिकों का पड़ोसी एक समवयस्क-विदुर डॉक्टर केङ्किची है , जो की एक बच्ची का पिता भी है। हालांकि दोनों में मिलना जुलना है किन्तु प्रेम जैसी कोई बात दिखाई नहीं देती है। एक दिन जब केङ्किची का किसी ग्रामीण क्षेत्र में कुछ वर्षों के लिए स्थानांतरण हो जाने की सूचना मिलती है तब नोरिकों उनके घर मिलने जाती है। तब केङ्किची की मान अनायास ही नोरिकों से कह बैठती है की काश केङ्किची की नोरिकों जैसी ...

A Conversation between Father and Daughter - Late Spring (晩春, Banshun)

Late  Spring फिल्म के उतरार्ध में पिता और पुत्री में जो बातें होती है उसे हर उस लड़का लड़की को सुननी चाहिए जो विवाह का इच्छुक है या विवाह को टाल रहा है।  पिता ने वैवाहिक जीवन के संबंध में अपनी बेटी को कुछ बेहतरीन बातें बतलाई हैं।       फिल्म के उतरार्ध में पिता और पुत्री के मध्य हुई बातें - नोरिकों – मैं केवल आपके साथ रहना चाहती हूँ, ऐसे ही। मैं कहीं नहीं जाना चाहती । मैं आपके साथ ऐसे ही सुखी हूँ। मैं अभी जैसी हूँ वैसी ही खुश हूँ , विवाह मुझे और ज्यादा सुखी नहीं करेगा। आप चाहो तो पुनः विवाह कर लीजिये। मैं आपके साथ रह लूँगी। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ। मेरा सबसे बड़ा सुख केवल आपका साथ है। हम अभी जैसे हैं वैसे ही क्यूँ नहीं रह सकते पिताजी। मैं नहीं सोचती विवाह मुझे और सुखी करेगा। शूकिची – ये सच नहीं है, ऐसा कुछ भी नहीं है। मैं 56 वर्ष का हो चुका हूँ , मेरा जीवन समाप्ती कि ओर है, लेकिन तुम्हारा जीवन तो अभी आरंभ हो रहा है , एक नया जीवन तो अभी आरंभ हो रहा है । एक जीवन जो तुम और साताके एक साथ निर्माण करोगे। मेरे से अलग एक जीवन । इसी तरह जीवन और इतिहास दोनों ...

OzuAasav - ओज़ुआसव

अगर कोई फिल्म वास्तव में आपके ज़हन में उतरती है तो वो कई दिनों तक आपका पीछा नहीं छोड़ती , वो आपके साथ बनी रहती है। वो कई दिनों तक आपको उसी Mode में रखती है । डोनाल्ड रिची के शब्दों में : ओज़ु जापानी परंपरा के प्रवक्ता के रूप में जाने जाते हैं क्योंकि – ओज़ु की फिल्मों का अंतिम प्रभाव एक प्रकार का ठहराव, उदासी और एक जानी-पहचानी शांति लिए हुए होता है जो जीवन की उधेड़बुन के पश्चात भी आपके साथ बना रहता है । अर्थात जीवन चलता रहता है और इसकी अस्थिरता , परिवर्तन और क्षणभंगुरता अपने साथ विषादजनक संतुष्टि प्रदान करती है । जापान में इसे Mono no aware 物の哀れ (जीवन की क्षणभंगुरता की अनुभूति )कहते हैं (Donald Richie, in Japanese Cinema: Film Style and National Character) Pic courtesy nytimes

Late Spring (晩春, Banshun)

Late Spring जीवन में परिवर्तन सरल नहीं होता है । जीवन अगर शांत-सुचारु रूप से चल रहा होता है तो हम उसे बदलना नहीं चाहते हैं । इसका एक मुख्य कारण ये है कि परिवर्तन अनिश्चित भी होता है। उथल पुथल का विचार बैचेनी को जन्म देता है। Late Spring फिल्म के बारे में ये कहा जाता है कि ये … "one of the most perfect, most complete, and most successful studies of character ever achieved in Japanese cinema." फिल्म है । कहानी Post – War जापान की है, नोरिकों की आयु विवाह योग्य हो चुकी है और वह अपने विदुर पिता के साथ रहती है। उसके पिता, बुआ, सहेली और सब को नोरिकों के विवाह की चिंता है , लेकिन नोरिकों है की विवाह के नाम से ही दूर भागती है। उसे चिंता है कि विवाह पश्चात उसके पिता कि देख-भाल कौन करेगा । उसके पिता के मित्र ओनोडेरा ने पुनर्विवाह किया है लेकिन नोरिकों कि दृष्टि में पुनर्विवाह एक अरूचिकर काम है । उसकी बुआ उसके लिए एक लड़का पसंद करती है वो चाहती है कि नोरिकों लड़के से एक बार मिल कर देख ले। लेकिन नोरिकों है कि बस टालती रहती है। और उसकी बुआ ने नोरिकों के पिता के लिए भी एक महिला देख...

The Flavor of Green Tea over Rice / お茶漬けの味, Ochazuke No Aji

The Flavor of Green Tea over Rice जापान मे रात के बचे हुए चावल को दूसरे दिन ग्रीन टी, वेजीटेबल ब्रोथ या गरम पानी मिला कर खाया जाता है जिसे ochazuke कहते हैं । The Flavor of Green Tea over Rice (जापानी में Ochazuke  no aji) फिल्म का नाम उसी से प्रेरित है । हमें किसी वस्तु या इंसान का महत्व तब पता चलता है जब हम उसे खो चुके होते हैं या मिस कर रहे होते हैं। रिक्तता , जो किसी के अभाव से उत्पन्न होती है , हमें उस व्यक्ति के उजलेपन से अवगत करवाती है। हालांकि ये भाव जब तक आते हैं हम उस व्यक्ति को खो चुके होते हैं। और उसके बाद जो व्यग्रता, बैचेनी और उद्वेग उत्पन्न होते हैं वो हमे जीवन पर्यंत सालते हैं । उस खोए हुए को पा लेना सब के भाग्य में नहीं होता। लेकिन हमारी फिल्म की नायिका टोएको उन कुछ भाग्यशाली लोगों मे से हैं। फिल्म एक धनी मध्यम वर्गीय पति-पत्नी की कहानी है । पत्नी (ताएको) अपने बेरूखे, सीधे-सरल और थोड़े पुराने तौर-तरीके वाले पति से बोर हो चुकी है या दूसरे शब्दों में कहें तो अपने जीवन से असंतुष्ट है । हालांकि पति एक बड़ी कंपनी में अछे पद पर आसीन है । उनकी एक भतीजी (सेत्सुकों)भी है जि...

Ozu Quote

मैं तो केवल अच्छीे सी एक प्लेट टोफू बनाना चाहता हूँ , यदि आपको कुछ अलग चाहिए तो फिर आपको किसी रेस्तरां या डिपार्टमेंट स्टोर की ओर जाना चाहिए । I just want to make a tray of good tofu.  If people want something different, they should go to the restaurant and department stores. - #YasujiroOzu #Ozu

ओज़ु ...

ओज़ु अपने में एक प्रकार का एकाकीपन लिए हुए थे । ये एकाकीपन उनकी फिल्मों में भी दिखाई देता है। चाहे वो कितना भी प्रसन्न दिखने का यत्न करे - मैं ये ये नहीं कहता कि वो कोई दिखावा कर रहे हैं, क्यूंकी उनका एक उजला पक्ष भी था । वो स्वयं को आनंदित रखते थे। वे आमोद-प्रमोद भी करते थे। लेकिन इन सब के साथ-साथ सदा एक एकाकीपन भी बना रहता था। इसीलिए मेरा उनमे विश्वास भी है। एकाकीपन से रिक्त कलाकार बहुत ही बोरिंग होते हैं। - Hidemi Kon  “Ozu had a kind of loneliness about him. This loneliness showed in his films. No matter how cheerful he acted –– and I don’t mean he was putting it on, because he had a truly bright side, too. He enjoyed himself. He liked to do fun things. But at the same time, there was always this loneliness. That’s why I believed in him. Artists without an air of loneliness are boring.” // Hidemi Kon

ओज़ू की फिल्मों के रोचक तथ्य

Late Spring का निर्माण उस दौर में हुआ था जब द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात जापान पर अमेरिकी सेना का अधिकार था। अमेरिकी सेंसर ने ये निश्चित कर रखा था कि जापानी फिल्मे अपने Pre-War जापानी संस्कृति से जुड़े विषयों पर फिल्मे न बनाए , न ही अपनी उस दौर कि राजनीति और परंपरा को महिमा मंडित करे। इसके साथ ही साथ सेंसर इस बात का भी ध्यान रखता था कि नयी फिल्मों मे जहां तक संभव हो पाश्चात्य संस्कृति और चिन्हों को भी स्थान मिले। इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण आपको Late Spring में दिखाई देगा जब मुख्य नायिका और उसका मित्र साइकल से घूमने जा रहे होते हैं और उस दृश्य में आपको सड़क के किनारेे एक Coca Cola का Billboard भी दिखाई देगा । #CocaCola  #YasujiroOzu 

Ozu Quote

" प्रत्येक जापानी अभिनेता किसी सैनिक कि भूमिका सरलता से निभा सकता है, और प्रत्येक जापानी अभिनेत्री एक वेश्या कि भूमिका कुछ सीमा तक निभा ही लेती है । लेकिन एक ऐसी अभिनेत्री का मिलना कठिन है जो एक कुलीन परिवार कि बेटी कि भूमिका सरलता से निभा सके। "  - सेत्सुकों हारा के विषय में यासुजीरों ओजू कि एक टिप्पणी । “Every Japanese actor can play the role of a soldier, and every Japanese actress can play the role of a prostitute to some extent, “However, it is rare to find an actress who can play the role of a daughter from a good family.” - Ozu said of Setsuko Hara. #Yasujiro #Ozu #TokyoStory #SetsukoHara

Ozu in Action

  ओजू  The Flavor Of Green Tea Over Rice  का फिल्मांकन करते हुए...   उनका अपना एक विशिष्ट Tripod हुआ करता था जो कि बिलकुल सतह के निकट होता था। कुछ सीन में   वो अपना कैमरा बस एक ही स्थान   पर स्थित रखते थे पूरे सीन के फिल्मांकन के दौरान  ।   

OzuAasav - ओजुआसव

"Waste not Your Thoughts on Eternity   DrainYour Glass ere Life is Gone "

OzuAasav - ओजुआसव

जीवन में सब हमें छोड़ कर चले जाते हैं… कुछ कब जाएंगे ये हमें कभी पता नहीं होता … लेकिन कुछ को कब छोड़ के जाना चाहिए ये हमें पता होना चाहिए।   #YasujiroOzu  #Ozu  #Yasujiro  #AnAutumnAfternoon #SanmaNoAji 

Floating Weeds (浮草, Ukikusa)

  Floating Weeds फ्लोटिंग वीड्स यासुजीरों ओजू की ही एक मूक   फिल्म का रीमेक है। फिल्म में एक भूमंतू थिएटर ग्रुप का मालिक कोमाजुरो   अपने समूह के साथ एक छोटे से गाँव में डेरा डालते हैं। वहीं गाँव में ही उसकी एक पुरानी प्रेमिका ओयोशी   भी रहती है , जिससे की   कोमाजुरो के एक अवैध संतान एक लड़का भी है। लेकिन लड़का इस बात से अनभिज्ञ है । ओयोशी गांव में ही एक छोटी सी   बार भी चलाती है। समूह में ही एक मुख्य नायिका भी है , सुमिकों ,   जो कोमाजुरो की फिलहाल प्रेमिका है। जब कोमजूरों रोज़ रोज़ सुबह कहीं निकाल जाता है तो सुमिकों को संदेह होता है। खोजबीन करने पर उसे ओयोशी और कोमाजुरो के मेल-मिलाप के संबंध में पता चलता है।   और वो एक दिन उसे रंगे हाथों पकड़ लेती है। दोनों में अनबन शुरू हो जाती है। कोमाजुरो को ये दखल-अंदाजी पसंद नहीं आती है और दोनों में झगड़ा हो जाता है। वो थिएटर की ही एक दूसरी एक्ट्रेस को कोमाजुरो के लड़के कियोशी   को फांसने   के लिए लगा देती है। कोमाजुरो को इसका पता चल जाता है।और दोनों में जाम कर झगड़ा होता है। उनके इस झगड़े में पू...

An Autumn Afternoon 秋刀魚の味, Sanma no aji

An Autumn Afternoon “Waste not your thoughts on eternity....Drain your Glass ere life is gone”   कहानी में   हिरायामा जो की एक अधेड़ उम्र का विदुर है अपनी शादी के लायक हो चुकी लड़की के लिए विवाह ठीक करता है । हिरायामा अपने स्कूल के सहपाठियों के साथ प्रायः एक बार में मिलता है । एक शाम वे अपनी स्कूल के अध्यापक ( ह्योतान) को भी आमंत्रित करते हैं। बहुत दिनों बाद सब मिलते हैं  उनसे।  नशे कि हालत में हयूतान उन्हे बताता है कि उसकी एक अधेड़ उम्र कि लड़की भी है जिसकी वो शादी नहीं कर पाया  । वो उसकी देखभाल करती है। वो कहता है उसने बहुत बड़ी गलती कर दी , मेरे स्वार्थ ने मेरी बेटी का जीवन नष्ट कर दिया , मैंने उसे अपने पास रखा क्यूंकी में अकेला था । उसके विवाह के मौके आए थे , लेकिन मैंने उन मौकों को खो दिया ।  हयूतान उनसे कहता है वो बहुत अकेला है , अकेला और दुखी। अंत में हम अपना जीवन अकेले ही व्यतीत करना पड़ता है। नितांत अकेले। अध्यापक हयूतान कि ये बातें हिरायामा के मन में घर कर जाती है , वो बैचेन हो उठता है , वो नहीं चाहता कि उसकी बेटी भी अविवाहित और अकेली रह...

Equinox Flower (彼岸花, Higanbana) 158

  किसी समस्या का सबसे न्याय संगत या ईमानदार समाधान/सुझाव वो होता है जो आप न सिर्फ दूसरों को दें बल्कि खुद पर भी आजमाएं । हमारी फिल्म के नायक हिरायामा यहीं पर मार खा जाते हैं । हिरायामा के पास अक्सर उसके दोस्त राय लेने आते हैं , चाहे वो शादी- विवाह को लेकर हो, पारिवारिक मुद्दे हो या कोई रोमांटिक मैटर । और हिरायामा बहुत ही सरलता और अंतर्दृष्टि से उन्हे अच्छे सुझाव भी देते रहते हैं लेकिन बात जब खुद के परिवार की आती है तब वो फिसल जाते हैं । एक दिन हिरायामा का मित्र मिकामी उसके पास अपनी एक समस्या लेकर आता है । मिकामी की बेटी घर छोड़ चुकी है क्यूंकी वो अरैंज मैरेज नहीं करना चाहती । वो चाहता है की हिरायामा उसकी बेटी फुमिकों को समझाये की वो उसकी बात मान ले । फुमिकों को एक संगीतकर से प्रेम है और वो उसी से विवाह करना चाहती है । एक दिन ऑफिस में हिरायामा से मिलने एक लड़का तानिगुची उसकी सेत्सुकों लड़की का हाथ मांगने आता है । हिरायामा इस बात से नाराज़ होता है उसकी बेटी कैसे उससे बिना पूछे विवाह के बारे में सोच सकती है । वो उसका बाहर निकालना बंद कर देता है। एक दिन सेत्सुकों की एक मित्र ...

Good Morning / Ohayo (1959)

  अगर आप 80 के दशक में पैदा हुए हैं जब टीवी एक लग्ज़री आइटम हुआ करता था और टीवी देखने पड़ोसियों के घर जाया जाता था तो यह फिल्म आपको काफी करीब लगेगी। जब ये फिल्म बनी थी तब टीवी हर घर में प्रचलित नहीं हुआ था । ये 50 के दशक की जापान एक छोटे शहर की कहानी है। फिल्म में एक छोटे से पड़ोसियों के समूह की रोज़ मर्रा की घटनाओं को दर्शाया गया है । एक दूसरे की आपसी छिटपुट चुगली और gossips । फिल्म दो जेनरेसन के बीच के चिरस्थाई द्वंद को दर्शाती है ॰ साथ ही साथ फिल्म दो छोटे भाइयों की कहानी भी कहती है जो पड़ोस में छुप छुप के टीवी देखने जाते हैं। लेकिन उनके घर वालों को ये बिलकुल पसंद नहीं होता की वो पड़ोसियों के यहाँ टीवी देखने जाये। क्यूंकी उस पड़ोसी की बीवी एक केबरे डांसर है । जब वो पैरेंट्स को टीवी खरीदने के लिए कहते हैं तो वो माना कर देते हैं । जब टीवी देखने का सिलसिला रुकता नहीं है तो एक दिन मटा पिता और पुत्रों में झगड़ा हो जाता है । और दोनों बेटे विरोध पर उतार आते हैं । और बच्चे बेचारे क्या विरोध कर सकते हैं ?? सोचिए । मौन विरोध । वो अपने मान बाप से बातचीत करना बंद कर देते हैं जब तक की घर में टीव...

Yasujirō Ozu 小津 安二郎

Yasujiro Ozu (1903 -1963) अगर आपको 60s की ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्में पसंद हैं जैसे की आनंद, मुसाफिर, अनुपमा, सत्यकाम , बावर्ची या अभिमान तो आपको जापान के सुप्रषिद्ध निर्देशक यासुजीरों ओज़ू अवश्य ही पसंद आएंगे । यासुजीरों जापान के उत्कृष्ट डाईरेक्टर्स मे से एक है । जिन्हे हम आर्ट हाउस सिनेमा वाले कहते हैं जैसे की फ्रेडेरिकों फेलिनी , अकीरा कुरोसावा , Jean Renoir या हमारे खुद के सत्यजित रे जैसे । यासुजीरों को जापान के श्रेष्ठतम डाईरेक्टर्स में भी “The Most Japanese of all the Japanese directors ” कहा जाता है इनकी फिल्मों में जापान के मॉडर्न और परंपरागत मूल्यों के बीच के द्वंद में सामंजस्य को दर्शाती हैं जैसा की हमे दो पीढ़ियों में देखते हैं । उनकी निर्देशित Tokyo Story फिल्म को विश्व की सर्वोत्तम फिल्मों मे से एक माना जाता है । स्कूल के दिनों मे ओज़ू कक्षा बँक करके फिल्में देखने भाग जाते थे । ओज़ू ने जब Civilization (1916) देखि तो उनपर फिल्म बनाने का भूत सवार हो गया । ओज़ू ने अपना कैरियर एक असिस्टेंट डाइरेक्टर के रूप में आरंभ किया , फिर कुछ शॉर्ट कॉमेडी फिल्में बनाई , फिर 1929 में अपनी पहली ...