तीन मित्र अपने एक दिवंगत मित्र की बेटी का विवाह करने का दायित्व लेते हैं।
एक शाम तीन मित्र अपने एक मित्र की बरसी पर उसकी विधवा पत्नी अकीको और बेटी अयाको से मिलते हैं। बेटी 24 वर्ष की हो चुकी है और तीनों को लगता है की उसकी आयु विवाह योग्य हो चुकी है। वे उसके लिए उपयुक्त वर की तलाश में लग जाते हैं। लड़का मिलता भी है लेकिन लड़की सहमत नहीं होती है क्यूंकी उसे चिंता है की विवाह के पश्चात उसकी माँ अकेली रह जाएगी और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं रहेगा। Late Spring फिल्म में भी कुछ ऐसा ही ताना-बाना होता है । उसमे एक विदुर पिता को अपनी 28 वर्षीय बेटी के विवाह की चिंता है और बेटी पिता को अकेला नहीं छोड़ना चाहती है ।
जिस तरह से Late Spring में पिता के पुनर्विवाह की बात निकाल कर आती है उसी तरह Late Autumn में तीनों मित्र सोचते हैं कि अगर इसकी माँ का पुनर्विवाह कर दिया जाये तो शायद लड़की मान जाये।
तीनों मित्र लड़की की माँ पर अपने कॉलेज के दिनों मे फ़िदा थे । उन तीनों मे से एक मित्र हिरायामा विदुर भी है सो उसे ही चुना जाता है कि वो लड़की कि माँ से विवाह कर ले । हिरायामा तैयार भी हो जाता है।
जब लड़की को माँ के पुनर्विवाह कि बात पता चलती है तो वो खिन्न हो जाती है क्यूंकी उसकी दृष्टि में पिता के मित्र से विवाह करना एक घृणित कार्य है ।
खैर कहानी में कई ट्विस्ट आते है, कई अनबन होते हैं , कई प्रश्नोत्तर होते हैं, कई भ्रांतियाँ भी होती है लेकिन अंततः अयाको मान जाती है । अकीको भी विवाह नहीं करने का निर्णय लेती है क्यूंकी उसे पुनर्विवाह में कोई रुचि नहीं होती है, वो तो सिर्फ उन मित्रो का अपनी ओर से एक प्रयास होता है कि किसी तरह अयाको विवाह कर ले तो मित्रता का दायित्व पूरा हो जाये।
विदुर हिरायामा जो कि विवाह को लेकर उत्साहित होता है उसे अंत में निराशा हाथ लगती है ।
अंत में अयाको को विवाह सम्पन्न होता है और फिल्म के अंतिम दृश्य में अकीको अपने घर में अकेली रह जाती है, उसके चेहरे पे दुःख और प्रसन्नता दोनों दिखाई देती है ।
Pic Courtesy criterion.com

Comments
Post a Comment