Skip to main content

An Inn in Tokyo (東京の宿, Tōkyō no yado) 1935


 An Inn in Tokyo (東京の宿, Tōkyō no yado) 1935 

Its Awful to be Poor

किहाची अपने दो छोटे लड़कों ज़ेन्को और मसाको के साथ काम के तलाश में मारा-मारा भटक रहा है । नौकरी है कि मिल ही नहीं रही । उस समय शायद रेबीज़ का प्रकोप चल रहा था, तो अगर किसी आवारा कुत्ते को पकड़ के नगर पालिका को सौंप दिया जाए तो उसके बदले कुछ पैसे दिये जाते थे। तो दिन भर नौकरी ढूंढो न मिले तो कुत्ता ढूंढो । किहाची और उसके लड़कों के पास ये एक उपाय था भोजन का प्रबंध करने का। रात को वो किसी सराय में सो जाते। 

एक दिन जब वो किसी होटल पर खाना खा चुके होते हैं तो उसकी मालकिन ओटसुने किहाची कि परिचित निकलती है। वो उसके लिए नौकरी ढूंढ देती है और रहने का प्रबंध कर देती है। उसके बच्चे भी स्कूल जाने लगते हैं। 

बेरोजगारी के दिनों में किहाची कि जान पहचान ओटाका और उसकी छोटी बच्ची कीमिकों से होती है, वो भी काम कि तलाश में है । 
किहाची उन्हे भी खाना खिलाने ओटसुने के पास लाता है। कीमिकों और किहाची के लड़कों कि अच्छी मित्रता हो जाती है । वे रोज़ स्कूल के पश्चात खेलने के लिए मिलते है।

जब कई दिनों तक कीमिकों खेलने नहीं आती है तो ज़ेन्को अपने पिता को बताता है। किहाची मन ही मन ओटका को चाहने लगा था । ये सुन कर वो उदास हो जाता है। 

किहाची को पता चलता है कि ओटाका एक बार में काम करने लगी है। पूछने पर पता चलता है कि उसकी लड़की अत्यंत बिमार है और उपचार के लिए पैसे ना होने के कारण उसके पास और कोई चारा नहीं था। 

चिकित्सालय जाने पर पता चलता है कि लड़की को उपचार कि शीघ्र आवश्यकता है , लेकिन दोनों के पास ही पैसे नहीं है । ओटसुने भी किहाची को पैसे देने से माना कर देत्ती है । और कोई उपाय न सुझाने पर किहाची पैसे चोरी करता है और अपने दोनों लड़कों को पैसे देकर ओटाका के पास अस्पताल भेज देता है। 

इधर पुलिस किहाची को ढूंढ रही है। किहाची ओटसुने को सब कुछ बता देता है और उससे अपने दोनों बच्चो कि देखभाल करने का अनुरोध करता है और स्वयं को पुलिस को सौंपने चल पड़ता है ।

Comments